बर्फ़ (A.K. RILKE)
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| फोटो साभार- Deodar Online |
किसी दिन, मैं तुमसे मिलने जरूर आऊंगा,
लेकिन कब और कहाँ, नहीं जनता मै.
शायद मैं बर्फ की तरह आऊं,
और तुम्हारे बालों को भीगो दूँ ,
या तुम्हारे हाथों को,
या शायद तुम्हारे दिल को,
चुपके से मै तुम्हारे स्वपन की यात्रा करूँगा,
तुम शायद समझ जाओगी, ये मै ही हूं ,
जब मैं ठण्ड मे तुम्हारे हाथों को थामूंगा,
और तुम मुझे पकड़ने के लिए उत्सुक होगी,
इसी उत्सुकता में तुम,
बहने वाली हवाओं से टकराओगी।
किसी दिन, मै जरूर आऊंगा,
उन सभी वादों को पूरा करने,
जो मैंने तुमसे किये थे,
क्यूंकि मैं जानता हूँ,
मुझे आना ही है,
और ये ही हमारा अमिठ प्यार है.
अनुवाद- Deodar Online

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